उस दुनिया में घूमता हूँ, जहां हर तरफ सितारे हैं

इस गहरे आकाश में,  सूरज भी है चन्दा भी है  – हम जैसा उल्का भी है, प्रथ्वी का कन्धा भी है
मंगल हो या बुध हो, सभी दोस्त हमारे हैं  – उस दुनिया में घूमता हूँ, जहां हर तरफ सितारे हैं

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हीरों की इस नगरी में, हसना सुबह शाम होगा  – उल्का की इस जर्नी में , मेरा क्या अंजाम होगा
गंगा हो या जमुना हो, सबके दो किनारे हैं – उस दुनिया में घूमता हूँ, जहां हर तरफ सितारे हैं

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अन्धकार में लेंस लगा के, उल्का का ये साइलेंस देखो – टाइम से आना टाइम से जाना, सबका अजब ये बैलेंस देखो
सर्दी हो या गर्मी हो, देखो मस्त बहारें हैं  – उस दुनिया में घूमता हूँ, जहां हर तरफ सितारे हैं

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कृतियों के ब्रह्माण्ड में, उल्का क्यों बदनाम है – पोएम के इस पाठक को, उल्का का प्रणाम है
बादल भी है बिजली भी है , बारिश की फुहारे हैं  – उस दुनिया में घूमता हूँ, जहां हर तरफ सितारे हैं

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Puneet Verma is environmental blogger & Mission Green Delhi(MGD) crusader. MGD digital platform has been supported by 400+ environmentalists from Delhi & other parts of India.

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