मुग्को वो आवाज अब, नयी नयी सी लगती है

 

हलकी सी नाराज और, खोई खोई सी लगती है  – मुघ्को ये दुनिया अब, सोयी सोयी सी लगती है
चलता हूँ मैं पथ पर अपने, उड़ता हूँ मैं रथ पर अपने  – मुग्को वो आवाज अब, नयी नयी सी लगती है
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तुग्को पीछे छोड़कर, पाया मैंने लाखों को  – दिल को अपने खोल दिया है,खोल दिया है आँखों को,
तेरी ये कहानी मुघ्को, कही कही सी लगति है  – चलता हूँ मैं पथ पर अपने, उड़ता हूँ मैं रथ पर अपने
मुग्को वो आवाज अब, नयी नयी सी लगती है
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पल पल सबका चेहरा बदला ,मनोरंजन की इस दुनिया में – कलाकार भी नए मिले, दुखभंजन की इस दुनिया में
मुघ्को उसकी हाँ भी अब, नहीं नहीं सी लगती है – चलता हूँ मैं पथ पर अपने, उड़ता हूँ मैं रथ पर अपने
मुग्को वो आवाज अब, नयी नयी सी लगती है

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Puneet Verma is environmental blogger & Mission Green Delhi(MGD) crusader. MGD digital platform has been supported by 400+ environmentalists from Delhi & other parts of India.

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