मेरी lines कौन सुनेगा

जबसे महखाना बंद हुआ,  ख़तम दिल का द्वन्द हुआ  – बिकनी बंद हुई शायरी की किताब ,सारे बायर कहाँ गए
ढून्ढ रहा हूँ कबसे उनको , गलिओं में, मेहखानों में  – मेरी lines कौन सुनेगा,  सारे शायर कहाँ गए ?

मुघ्को पागल कहने वाले, खुद को पहले ठीक कराले – सच्चे लोग ही बचे हैं क्या अब , सारे लायर कहाँ गए
ढून्ढ रहा हूँ कबसे उनको , गलिओं में, मेहखानों में   – मेरी lines कौन सुनेगा,  सारे शायर कहाँ गए ?

अपने देश का तू है राजा ,हिम्मत है तो मैदान में आजा – हिम्मत वान ही बचे हैं क्या अब, सारे कायर कहाँ गए
ढून्ढ रहा हूँ कबसे उनको , गलिओं में, मेहखानों में   – मेरी lines कौन सुनेगा,  सारे शायर कहाँ गए ?

अपना सिस्टम groove कराले, मुघसे lines approve कराले – लगा हूँ मैं अब आग बुझाने , लगाके फायर कहाँ गए
ढून्ढ रहा हूँ कबसे उनको , गलिओं में, मेहखानों में  – मेरी lines कौन सुनेगा,  सारे शायर कहाँ गए ?

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Hello Friends, my name is Puneet Verma and I am a passionate traveler, environment blogger, and nature lover. People call me a visual storyteller and influencer and God has given me an opportunity to initiate a beautiful community of environment enthusiasts at missiongreenindia.org and missiongreendelhi.com.

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