A Way to New Life

आज हम इतने अज्ञानी क्यों हो गए हैं ? 100 किताबें पड़ने से अच्छा अगर एक किताब समझ ली होती तो आज ये सब नहीं देखना पड़ता. ये चिंता, डर इर्ष्या, नफरत, लालच, विलाप  और धोखा जो आज बदकिस्मती से हम देख रहे है, पैदा ही नहीं होते. लेकिन अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा. यह ज्ञान की सुबह आज भी हो सकती है. जरूरत है लालच के जंगल से बाहर निकलकर ज्ञान के पवित्र दरिया में गोता लगाने की. ये ज्ञान का दरिया इतना पवित्र है की इसको छुते ही हमारे जीवन के सारे कष्ट, दुःख, अकेलापन और अज्ञान का अन्धकार, आंसुओं के रूप में बाहर निकल जाते हैं और हम फिर से पवित्र हो जाते हैं. और इसका एकमात्र उपाए ग्यानी लोगों की संगत है जो की किताब के रूप में हम ग्रहण कर सकते हैं. जब हम ज्ञान का पहला पन्ना पड़ेगें तो पाएंगे की जीवन का नाम संतुलन है.  इसका अर्थ है जीवन में हम कोई भी कार्य करें तो उसमे हमे संतुलित रहने की आवशयकता है. और अगर हम इस संतुलित जीवन की शुरुआत करना चाहते हैं तो हमे अपने सुनने, खाने, कार्य करने, सोने, पीने, रोने, पड़ने, खेलने, हंसने, देखने, बोलने, सोचने और सांस लेने में संतुलन रखना सीखना होगा. अगर हम अभ्यास करते हैं और ऐसा करते हैं तो एक नए दिन से हमारे नए जीवन की शुरुआत हो जाती है. ज्ञान का दूसरा पन्ना खोलते ही हमारे मन में प्रेम रस बहने लगता है और इस चहरे पर दुःख और किसी को खोने के कारण जो मुस्कान चली गयी थी वो वापस आ जाती है और हम एक नवजात शिशु  की तरह फिर से जीवन की शरुआत करते हैं, सीखना शुरू करते हैं और आनंदमय जीवन जीना प्रारंभ करते हैं.

Facebook Comments
Puneet Verma
Puneet Verma, is founder, promoter & author of Mission Green Delhi platform. He is Acumen & Ideo.org certified Human-Centered Design professional as well. You can find more than 600 articles, stories and poems written by him on this online publication. To share thoughts with him, you can whatsapp him at +91- 9910162399. Puneet had worked with The QED Group LLC (www.qedgroupllc.com), Washington DC based International Development sector management consulting firm and looked after their web projects.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

16 − three =

What are you looking for ?


Your Email

Let us know your need

×
Connect with Us

Your Name (required)

Your Email (required)

Your Message

×
Subscribe

×
Translate »
Close