अभिमन्यु को सब आज बचाओ

अभिमन्यु को सब आज बचाओ
शुरू हो गया प्रजातंत्र में, कुरुक्षेत्र का युद्ध ये देखो
सारे कौरव पीछे पड़ गए, अभिमन्यु के विरुद्ध ये देखो
कौन बचाए अभिमन्यु को, कोई उसको व्यूह बताओ
देश की खातिर शहर में अपने, अर्जुन को तुम आज जगाओ
 
अर्जुन देखो आज रो रहा, अपनों की इस पीड़ा में
अपनों में वो आज खो गया, वक़्त बिताए क्रीड़ा में
सब कुछ छोड़छाड़ कर अब तुम, अभिमन्यु की जान बचाओ
देश की खातिर शहर में अपने, अर्जुन को तुम आज जगाओ
 
धर्म मार्ग पर चलने को, कृष्ण हमे निर्देश दे रहे
धनुष उठाओ उनपर अब तो, जो हमको सब द्वेष दे रहे
मुश्किल लगता हर पल तुमको, ऐसा अब तुम कदम उठाओ
देश की खातिर शहर में अपने, अर्जुन को तुम आज जगाओ
 
– पुनीत वर्मा की कलम से, मिशन ग्रीन दिल्ली

नोटबंदी की पंक्तियाँ

नोटबंदी की पंक्तियाँ

देश की ये पंक्तियाँ, इक दिन कम हो जाएंगी
सब दूर दूर हो जाएंगे, और आँखें नम हो जाएंगी
जो अकेला था कभी, उदासी की छावँ में
साथ हमारे आज खड़ा है, शहर में और गाँव में
उसकी ये सूखी आँखें, इक दिन नम हो जाएंगी
जब रोता मासूम हँसेगा, चिंता कम हो जाएगी
सब दूर दूर हो जाएंगे, और आँखें नम हो जाएंगी

देश की खातिर आज खड़े हैं, पैसे तो बहाना है
उस पीतल की चिड़िया को हमने, सोने का बनाना है
आतंक का सर आज झुकेगा, छुरी मलहम हो जाएंगी
जब रोता मासूम हँसेगा, चिंता कम हो जाएगी
सब दूर दूर हो जाएंगे, और आँखें नम हो जाएंगी

हिन्दू मुस्लिम एक हुआ है, जो इनसे टकराएगा
टक्कर खा कर पंक्ति से , सर उसका चकराएगा
जिसमे तेरे प्राण फंसे हैं , वो माया भ्र्म हो जाएगी
जब रोता मासूम हँसेगा, चिंता कम हो जाएगी
सब दूर दूर हो जाएंगे, और आँखें नम हो जाएंगी

पोल्लुशन की दौड़ में हमने , नंबर एक जो पाया है

पोल्लुशन की दौड़ में हमने , नंबर एक जो पाया है

धुंए का ये बादल देखो, हमने आज बनाया है
अर्जित नहीं किया है उतना, जितना आज गवाया है
शहर की अपने हुई तररक्की, दुनिया रह गई हक्की बक्की
पोल्लुशन की दौड़ में हमने , नंबर एक जो पाया है

इतना क्यों मजबूर हुए हम, पैदल चलना भूल गए
दो पैसे की अक्ल ना पाई, काहे हम सब स्कूल गए
अपनी अपनी कार घुसाकर, ट्रैफिक जैम लगाया है
पोल्लुशन की दौड़ में हमने , नंबर एक जो पाया है

काहे तू बस अपनी सोचे, अपनों की भी सोच ले
साँसे तेरी बंद हो रही, ऑक्सीजन का डोस ले
शहर को अपने नरक बनाया, क्या तूने आज कमाया है
पोल्लुशन की दौड़ में हमने , नंबर एक जो पाया है

गुस्सा अपना ख़तम करो अब, कार चलाना आज छोड़ दो
मेट्रो से भई ट्रेवल कर लो, खाली कर दो आज रोड को
भुगत रहे फल हरपल हमसब, कूड़ा जो फैलाया है
पोल्लुशन की दौड़ में हमने , नंबर एक जो पाया है

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