मूर्ति पूजा क्यों ?

Puneet VermaBy on August 18, 2013

एक सवाल जो आज हर कोई करता है वो है की भारत में मूर्ति पूजा क्यों की जाती है जबकि वेदों में कहा गया है इश्वर एक है. और उसका कोई आकार नहीं है.  मैं हाल ही मैं स्वामी विवेकानंद की एक फिल्म देख रहा था जिसमे एक राजा ने ये सवाल स्वामी जी से किया था. तो स्वामी जी ने दिवार पर राजा की एक तस्वीर  देखी । उन्होंने उसके मंत्री को वो तस्वीर उतारने को कहा।  जैसे ही मंत्री ने वो तस्वीर उतारी स्वामी जी ने उसको राजा की तस्वीर पर थूकने को कहा. मंत्री और राजा दोनों यह सुनकर हैरान हो गए. मंत्री बोला मैं ऐसा कैसे  कर सकता हूँ , ये तो महाराज का अपमान होगा। फिर स्वामी जी ने तर्क देते हुए कहा की यह जो तस्वीर है, कागज, रंग, लकड़ी और शीशे से बनी है. यह महाराज नहीं हैं बल्कि महराज से अलग कोई और तत्व है जिस पर आप थूक सकते हैं. लेकिन मंत्री बोला मैं ऐसा नहीं कर सकता हूँ क्योंकि इस तस्वीर को देखकर मेरे मन और बुधि को महाराज, उनकी शान शौर्य और अच्छे कर्म ही दिखाई देते हैं। यह तस्वीर प्रेरणा का स्त्रोत है. मैं अपने स्वप्न में भी इस तस्वीर पर नहीं थूकने का विचार नहीं ला सकता हूँ. ये सब सुनकर स्वामी जी बताते हैं की किसी भी मूर्ति को इसलिए बनाया और पूजा जाता है ताकि उस मूर्ति की प्रतिमा और उससे जुड़े शुद्द कर्मो और विचारों को स्मरण किया जा सके, उससे प्रेरणा ली जा सके और अपने जीवन में उससे जुड़े विचारों को उतारा जा सके. ऐसा करने से विचारों की शुधि होती है और हम परम पिता परमात्मा के और करीब आ जाते हैं.

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Colors Worked for Me

Puneet VermaBy on September 13, 2012

हमारा जीवन हर पल किसी ना किसी  चीज़ से प्रभावित होता रहता है. जैसे कभी कभी मुघे रंग प्रभावित करते हैं. अक्सर मुघे हरा रंग अच्छा लगने लगता  है और मैं सोचता हूँ की काश पूरे शहर का कोई कोना ऐसा ना बचे जहां शीतल पेड़ ना हों, हर जगह केवल पेड़ों की ठंडी छाया हो जो हमे सुकून और आराम दे सके, स्वस्थ्य दे सके. बारिश के मौसम में मुझको आकाश का गहरा नीला रंग अच्छा लगता है, जो मुघे अपनी गहराई में लेकर जाता है और मैं उसकी ठंडी घटा में पूरी तरह से डूब जाता हूँ. कभी मुघे कटे हुए आम का पीला रंग अच्छा लगता है और मन उसका आनंद लेने के लिए ललचाता है. कभी लाल रंग का टीका लोगों के मस्तिस्क पे अच्छा लगता है क्योंकि मुघे वो अद्यात्मिक, सच्चे, शांत और ग्यानी प्रतीत होते हैं. कभी कपड़ों का सफ़ेद रंग अच्छा लगता है क्योंकि वो मुघे मन और तन की पवित्रता का आभास करवाता है. काले रंग के आकाश में टिम टिम करते सफ़ेद तारे मुघे अहसास करवाते हैं की मेरे जीवन में मित्रों की कमी नहीं है और में अकेला नहीं हूँ.  सच कहूँ तो रंग मेरी सोच को हर पल बदलते रहते हैं और मेरी सोच मेरे जीवन को मनोरंजक बना देती है.

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What is Right & What is Wrong ?

Puneet VermaBy on July 15, 2012

आज मस्तिस्क में एक सवाल उठा है. हम अपनी डेली लाइफ में कैसे पता लगाएं की क्या सही है और क्या गलत.तो मुघे जवाब मिलता है की दुनिया में कोई भी चीज़ सही या गलत नहीं है. बल्कि मैं उसे कैसे स्वीकार करता हूँ वो भाव सही और गलत होता है.यानि अगर मैं किसी गलत चीज़ को सही भाव से स्वीकार करता हूँ वो तो सही है. और अगर किसी सही व्यक्ति को गलत भाव से स्वीकार करता हूँ वो गलत है. मेरा संचालन सही या गलत होता है. जैसे की अगर मैं किसी ग्रन्थ को पढ़ना चाहता हूँ और इस कारण उसको खोलता हूँ. फिर उसमे लिखे शब्दों को पड़ता हूँ . और फिर शब्दों के पीछे के भावों को गलत तरीके से ग्रहण करता हूँ और समझता हूँ और बांटता हूँ. तो यहाँ मैं गलत हो जाता हूँ.  सामने खड़ा व्यक्ति किसी कमजोर को नुक्सान पहुंचा रहा है और मैं राम की तरह सुग्रीव की मदद करता हूँ, तो मेरा सञ्चालन सही हो जाता है. अगर मैं इसे अनदेखा कर देता हूँ तो ये गलत हो जाता है. दो तरह के लोग है: जो सोये हुए हैं और वो जो जागे हुए हैं.पराशूट और दिमाग जब तक खुले हैं तब तक काम करते हैं. हमारा हर वो कार्य जो हमारी बंद आँखें खोल देता है वो सही है. और हमारा हर वो कार्य जो हमारे मन और बुद्धि रुपी चक्षुओं को बंद कर देता है, वो गलत है. अगर मेरा वर्तमान कार्य मेरे ज्ञान चक्षुओं को खोल रहा है, तो मेरा आज सही होगा.  अगर मेरा आज या वर्तमान सही है तो वो सही भूतकाल में बदल जाएगा. और अगर भूतकाल और वर्तमान सही हैं तो भविष्य का निर्माण सही होगा.

 

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