Dev Ujala Bharte Nabh Mein

देव उजाला भरते नभ में
तारागण की चितवन चकित
पवन सुगंधित सौरभ विस्मित
जल जीवन जलधि हो अमृत
औषध हरित पुलकित सुरभित
खगकुल फैल गगन में उलसित
पुष्पों से हो श्वास परिपूरित
वृक्ष फलों से झूमें हो गर्भित
बाल वृन्द की किलकारी पुलकित
हो नववर्ष की भोर विलसित
आमोद हो प्रमोद हो स्वास्थ्य हो
रहे वसुधा रंग तरंगित परिपूरित

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Bhupesh Khatri Ji is hindi and urdu poet who belongs to Allahabad. He works as Deputy Director (software) at IGNOU, New Delhi.
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