Samjha Maine Har Pal Ko


रूठ रूठ कर चेहरे से, चिंता की इक नदी बहा दी – सर्द भरी तन्हाई में, तेरी हंसी ने आग लगा दी

दिल तक उनके लेकर जाना, खुशिओं की इस बस्ती को – समझा मैंने हर पल को, हर पल की इस मस्ती को


देख के अपनी शाखा को, दिल को अपने क्यों जलाए – छेड़ छेड़ के यादों को , मन को अपने क्यों रुलाए

आशा की इस नदिया में, पार लगा दो कश्ती को – समझा मैंने हर पल को, हर पल की इस मस्ती को


क्रोध का प्याला पीते पीते, तन को तेरे क्या हो गया – अन्धकार को जीते जीते, मन को तेरे क्या हो गया

खुद से थोडा प्यार करो तुम, प्यार करो इस हस्ती को – समझा मैंने हर पल को, हर पल की इस मस्ती को

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Puneet Verma is environmental blogger & Mission Green Delhi(MGD) crusader. MGD digital platform has been supported by 400+ environmentalists from Delhi & other parts of India.

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