हमको छुट्टी नहीं चाहिए, ग्रीन टेक पे लिखना है

ग्रीन डे का जशन मनाके, ग्रीन जूस का सिप लगा लो   – कर्म  को अपने गले लगाके, सन्डे को भी ग्रीन बना लो
कहत पुनीत सुनो भाई साधो, ग्रीन ब्लॉग पे दिखना है  – हमको छुट्टी नहीं चाहिए, ग्रीन टेक पे लिखना है

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मन को अपने ग्रीन बना के, सिटी को अपनी क्लीन बना लो  – मिशन ग्रीन का भोग लगा के, प्रोडक्ट को अपने ग्रीन बना लो
दिल्ली की हर शाप में, ग्रीन फ़ूड ही बिकना है  – हमको छुट्टी नहीं चाहिए, ग्रीन टेक पे लिखना है

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पेड़ की जड़ को पीठ दिखाके, ड़ाल को कब तक सींचोगे – ग्रीन ब्लॉग से नजर चुराके, आँख को कब तक मीचोगे
माया के इस लोक में, ग्रीन हार्ट ही टिकना है  – हमको छुट्टी नहीं चाहिए, ग्रीन टेक पे लिखना है

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