विजय लालसा भस्म हो गयी

Puneet Verma




By on October 17, 2014

क्रोध भावना खत्म हो रही, मिशन ग्रीन का छंद है ऐसा
पल पल मुझको रोक रहा है, मन का मेरे द्वन्द है ऐसा
ग्रीन टेक की कविताओं से, देखो प्रारम्भ रस्म हो गयी
चिंता चिंतन आज बन गयी, विजय लालसा भस्म हो गयी

ज्ञान का सूरज उदय हुआ अब, बारिश कर दी मौला जी ने
रफ़ी साहब का फिर वो गाना, सुना दिया बडोला जी ने
अनमोल शायरी बरस रही है, रात हमारी जश्न हो गयी
चिंता चिंतन आज बन गयी, विजय लालसा भस्म हो गयी

कविताओं की महफ़िल में, इच्छाओं का नाश हुआ है
निधिवान ये हृदय हुआ अब, तृष्णा का विनाश हुआ है
अंशुमन से भर गयी उषा, दृद्द हमारी कसम हो गयी
चिंता चिंतन आज बन गयी, विजय लालसा भस्म हो गयी

मिशन ग्रीन की एक पल्लवी, हम सब डालें कविताओं में
जसप्रीत हमारा मन हो जाए, कृष्ण प्रीत की सविताओं में
रुचित हमारा छंद हो गया, कविता अपनी स्वस्थ हो गयी
चिंता चिंतन आज बन गयी, विजय लालसा भस्म हो गयी

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Konosuke Matsushita, Guide to Customer Service

Puneet Verma




By on October 11, 2014

matshushitaMatsushita was standing in line of customers for more than 2 hours in hot sun. His employee saw him and came running towards him. Matsushita told him with anger that he is not important, but the people who buy their products are important … So serve customer and not your bosses.

Konosuke Matsushita was more than 90 years of age. He was showing plant to customers. And when customers left he stood up from his wheel chair, and bow down his head for customers .

Matsushita was at five star hotel. The food served to him by chef was too much. So instead of scolding chef, he told chef that the food you have served is best, but my stomach is very small. He knew that chef is the decision maker while hotel purchases panasonic cooking products. By not scolding chef and praising him for his work … Matsushita taught us that customer is everywhere & we have to respect them.

Matsushita started his quest for purpose in life and found his purpose “I will make electrical bulbs that would cost less than cost of glass of water”

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बॉस से मुझको आज बचाए, वही बहाना सोच रहा हूँ

Puneet Verma




By on

मस्त भरे इस मौसम में, जल्दी उठना  क्राइम हो गया
योगा करना भूल गया मैं,ऑफिस का अब टाइम हो गया
ट्राफिक के इस दल दल में, बालों को मैं नोच रहा हूँ
बॉस से मुझको आज बचाए, वही बहाना सोच रहा हूँ

चाहे ऑफिस जल्दी जाऊं, चाहे जाऊं मैं देर से
शार्ट रुट से दौड़ लगाऊँ, पहुंचु फिर भी मैं देर से
भाग रहा हूँ ऑफिस जैसे, मिल्खा सिंग का कोच रहा हूँ
ट्राफिक के इस दल दल में, बालों को मैं नोच रहा हूँ
बॉस से मुझको आज बचाए, वही बहाना सोच रहा हूँ

सोते सोते बिस्तर में, मॉर्निंग वाक का प्लान बनाया
रीट्वीट कराकर लोगों को, ग्रीन ब्लॉग का फैन बनाया
अपने को में बॉस मानकर, दुनिआ को मैं कोस रहा हूँ
ट्राफिक के इस दल दल में, बालों को मैं नोच रहा हूँ
बॉस से मुझको आज बचाए, वही बहाना सोच रहा हूँ

पानी गिर गया मुख पर मेरे, पानी फिर गया ग्रीन ड्रीम पर
सोने में फिर लेट हो गया, कविता लिखकर मिशन ग्रीन पर
ग्रीन टेक के प्याले में, देखो पी मैं स्कॉच रहा हूँ
ट्राफिक के इस दल दल में, बालों को मैं नोच रहा हूँ
बॉस से मुझको आज बचाए, वही बहाना सोच रहा हूँ

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