हमको छुट्टी नहीं चाहिए, ग्रीन टेक पे लिखना है

ग्रीन डे का जशन मनाके, ग्रीन जूस का सिप लगा लो   – कर्म  को अपने गले लगाके, सन्डे को भी ग्रीन बना लो
कहत पुनीत सुनो भाई साधो, ग्रीन ब्लॉग पे दिखना है  – हमको छुट्टी नहीं चाहिए, ग्रीन टेक पे लिखना है

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मन को अपने ग्रीन बना के, सिटी को अपनी क्लीन बना लो  – मिशन ग्रीन का भोग लगा के, प्रोडक्ट को अपने ग्रीन बना लो
दिल्ली की हर शाप में, ग्रीन फ़ूड ही बिकना है  – हमको छुट्टी नहीं चाहिए, ग्रीन टेक पे लिखना है

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पेड़ की जड़ को पीठ दिखाके, ड़ाल को कब तक सींचोगे – ग्रीन ब्लॉग से नजर चुराके, आँख को कब तक मीचोगे
माया के इस लोक में, ग्रीन हार्ट ही टिकना है  – हमको छुट्टी नहीं चाहिए, ग्रीन टेक पे लिखना है

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ग्रीन ब्लॉग के दर्शन करके, ग्रीन टेक पे मस्ती कर ले

क्यों तू इतना काम करे है, सड़क पे इतना जाम करे है – फ़ोन पे अपना कान लगाके, ख़तम तू अपना कान करे है
काम पे अपने फौक्स करके ,फाइंड तू अपनी हस्ती कर ले – ग्रीन ब्लॉग के दर्शन करके, ग्रीन टेक पे मस्ती कर ले
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इन्टरनेट से प्यार करे हो, जाल में इसके झूल रहे हो – कभी तो हमका कॉल करो तुम, सब कुछ क्यों तुम भूल गए हो
हर पल अपनी स्क्रीन देखकर, हालत अपनी खस्ती कर ले – काम पे अपने फौक्स करके ,फाइंड तू अपनी हस्ती कर ले
ग्रीन ब्लॉग के दर्शन करके, ग्रीन टेक पे मस्ती कर ले
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टाइम स्टील तू अपना करके, कब तक यूँ ही ब्राउस करेगा – ऊँगली उस पर मार मार कर, क़त्ल तू अपना माउस करेगा
सिस्टम को जय राम बोलकर , बिजली अपनी सस्ती कर ले – काम पे अपने फौक्स करके ,फाइंड तू अपनी हस्ती कर ले
ग्रीन ब्लॉग के दर्शन करके, ग्रीन टेक पे मस्ती कर ले

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