कल्च से मैं परेशान हुआ

ब्रेक से हर पल पैर हटाकर, कल्च से मैं परेशान हुआ  – रोड पे अपना समय गवांकर, देखो मैं बेजान हुआ
कार को अपनी रेस्ट दिला कर, देखो दिल्ली जाग रही है  – जल्दी जल्दी पकड़ लो उसको, दिल्ली मेट्रो भाग रही है
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स्मार्ट कार्ड से जीवन सुधरा, शहर का अपने ज्ञान हुआ  – दांडी मार्च का असर हुआ वो, देखो मैं बलवान हुआ
मिशन ग्रीन की चिंगारी से, सुलग सुहानी आग रही  है – कार को अपनी रेस्ट दिला कर, देखो दिल्ली जाग रही है
जल्दी जल्दी पकड़ लो उसको, दिल्ली मेट्रो भाग रही है

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स्टेशन पर मुलाकात हुई है, नए पुराने यारों की  – मिलकर हमने जश्न मनाया, बात बनी है प्यारों की
मिशन ग्रीन की भागीदारी , दिल्ली मुघसे मांग रही है – कार को अपनी रेस्ट दिला कर, देखो दिल्ली जाग रही है
जल्दी जल्दी पकड़ लो उसको, दिल्ली मेट्रो भाग रही है

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Three Years of Green Journey

३ सितम्बर २००९ को मिशन ग्रीन दिल्ली ब्लॉग की शुरुआत हुई थी और कल  सोमवार को मिशन ग्रीन प्रोजेक्ट ने अपने तीन वर्ष पूरे किए. और इन् तीन वर्षों में इस मिशन ग्रीन दिल्ली बुक पर मैंने  ३०० से ज्यादा लेख और  कहानीया और इकतालीस  कविताएँ पूरी की.  ये कविताएं आप मिशन ग्रीन दिल्ली बुक पे या यूटूब चैनल “ऑनलाइन मार्निंग”  पे सुन सकते हैं.

इस तीन साल के सफ़र में जो कुछ मिशन ग्रीन दिल्ली ने सिखाया उन् सभी बातों को याद करके मन बहुत प्रसन्न होता है और बुद्दी मानो इंटेल की चिप से भी तेज भागती हुई प्रतीत होती है.किसी ने सच ही कहा है की “ज्ञान जीवन में वो रौशनी लेकर आता हो, जिससे हमे अन्धकार से भरे, जीवन रुपी जंगल में,  कई रास्ते दिखाई पड़ते हैं”. इस ब्लॉग ने सिखाया की कैसे एक  व्यक्ति के हालात उसकी सोच को भावनाओं के बंद कमरे में कैद कर देते हैं जहां सिर्फ अँधेरा ही अँधेरा दिखाई देता है लेकिन कोई खुला दरवाजा नहीं होता. और कैसे ज्ञान रुपी कश्ती हमे उस अन्धकारमय समंदर से उठा कर बाहर ले आती है. और वो दुःख, कष्ट, याद के पल एक स्वपन की तरह समाप्त हो जाते हैं और सुहानी सुबह हो जाती है.

मिशन ग्रीन दिल्ली ब्लॉग सिखाता है की जीवन में केवल भावनाओं में घिरे रहना ठीक नहीं है. कभी कभी हमे अपनी इस सोच की जंजीर को तोडना पड़ता है और एक कंप्यूटर की भांति सोच पैदा करनी पड़ती है. जिस प्रकार एक कंप्यूटर ज्ञान लेता है और फिर भावना रहित होकर उसको बाँटता है उसी प्रकार व्यक्ति को अपनी सोच में बदलाव करते हुए ज्ञान की शरण में जाना चाहिए. ज्ञान की शरण में जाते ही हम सचाई पर कार्य करते हैं और वर्तमान में जीते हैं. ज्ञान हमे आशावादी और सकारात्मक सोच देता है,  और हम देश, शहर और इन्सानिअत की समृधि के बारे में सोचने लगते हैं. हम अपनी कमियों पर गौर करना सीखते हैं और उसके ऊपर काम करते हैं. और अपने विचारों की रेल गाडी को एक स्टेशन से अगले स्टेशन पर ले जाते हैं. और इस तरह अपनी जीवन रूपी यात्रा को उम्दा और मनोरंजक बना लेते हैं.

 

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