मोटापा दूर हो गया, मौसम सुहाना हो गया

मोटापा। क्यों बहुत परेशान करता है ना ? अगर आपको कोई एक किलो मीटर भागने के लिए बोले तो सोच में पड़ जाते हो ना ? अगर आपको ऑफिस की पांचवी मंजिल तक भी जाना हो तो लिफ्ट का इंतज़ार करते हो ना ? मेट्रो में सीड़ियों का इस्तेमाल करने की बजाए एलीवेटर पे चढ़ जाते हो ना ? थोडा ज्यादा चलने पर ही टांगो में दर्द होने लगता है ना. पल पल नींद आने लगती है और सोने को दिल करता है ना ? थोडा सा ऊपर चड़ने पर सांस चड़ने लगती है ना?

इन् सभी मुश्किलों को पांच से पंद्रह मिनट में दूर किया जा सकता है। स्वामी रामदेव जी ने इसके उपाए अपनी वेबसाइट पर बताए हैं. जिसमे उन्होंने कपालभाती, प्राणयाम, लोम विलोम जैसे आसनों के बारे में बताया है जिन्हें केवल पांच से पंद्रह मिनट करने मात्र से आपको अपने अन्दर एक नयी उर्जा महसूस होने लगेगी और धीरे धीरे आपका शरीर भारीपन को छोड़कर हवा में ऊपर उड़ने लगेगा और आप हर कार्य को खुले दिमाग, प्रसन्ता और शांत मन से पूर्ण कर पाएंगे।

करना कुछ नहीं है बस अपनी जिंदगी को बदलने के लिए आधा घंटा सुबह और आधा घंटा शाम को निकालना है और अपने घर के अन्दर ही सुबह और शाम के दो योगा सेशन शुरू करने होंगे। ऐसा करने से थोड़े दिनों में ही आपके परिवार के बाकी सदस्य भी इन् सेशंस का हिस्सा  बन जाएंगे और आपकी जिंदगी खुश्मय होने लगेगी। मैं उम्मीद करता हूँ आप धीरे धीरे और प्रेम से योग करते हुए अपनी और अपने परिवार की जिंदगी को एक नए और खुशहाल रास्ते पर लेकर जाएंगे। धन्यवाद

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मूर्ति पूजा क्यों ?

एक सवाल जो आज हर कोई करता है वो है की भारत में मूर्ति पूजा क्यों की जाती है जबकि वेदों में कहा गया है इश्वर एक है. और उसका कोई आकार नहीं है.  मैं हाल ही मैं स्वामी विवेकानंद की एक फिल्म देख रहा था जिसमे एक राजा ने ये सवाल स्वामी जी से किया था. तो स्वामी जी ने दिवार पर राजा की एक तस्वीर  देखी । उन्होंने उसके मंत्री को वो तस्वीर उतारने को कहा।  जैसे ही मंत्री ने वो तस्वीर उतारी स्वामी जी ने उसको राजा की तस्वीर पर थूकने को कहा. मंत्री और राजा दोनों यह सुनकर हैरान हो गए. मंत्री बोला मैं ऐसा कैसे  कर सकता हूँ , ये तो महाराज का अपमान होगा। फिर स्वामी जी ने तर्क देते हुए कहा की यह जो तस्वीर है, कागज, रंग, लकड़ी और शीशे से बनी है. यह महाराज नहीं हैं बल्कि महराज से अलग कोई और तत्व है जिस पर आप थूक सकते हैं. लेकिन मंत्री बोला मैं ऐसा नहीं कर सकता हूँ क्योंकि इस तस्वीर को देखकर मेरे मन और बुधि को महाराज, उनकी शान शौर्य और अच्छे कर्म ही दिखाई देते हैं। यह तस्वीर प्रेरणा का स्त्रोत है. मैं अपने स्वप्न में भी इस तस्वीर पर नहीं थूकने का विचार नहीं ला सकता हूँ. ये सब सुनकर स्वामी जी बताते हैं की किसी भी मूर्ति को इसलिए बनाया और पूजा जाता है ताकि उस मूर्ति की प्रतिमा और उससे जुड़े शुद्द कर्मो और विचारों को स्मरण किया जा सके, उससे प्रेरणा ली जा सके और अपने जीवन में उससे जुड़े विचारों को उतारा जा सके. ऐसा करने से विचारों की शुधि होती है और हम परम पिता परमात्मा के और करीब आ जाते हैं.

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भारत की आजादी का, मतलब आज समझ में आया

क्रान्ति का वो दौर चला है, भ्रष्ट सोच का महल जला है – पल पल कैसे लालच की, ख़तम हो रही आज बला है
चिंता की जंजीरें टूटी, बदल गयी है अपनी काया – भारत की आजादी का, मतलब आज समझ में आया

इत्तिहास पुराना आज जानकार, देश पे अपने नाज हो गया – सच के आगे सर झुकाकर, क्रांतिवीर मै आज हो गया
माइंड देश का ग्रीन हुआ है, हरियाली का अब मौसम आया – चिंता की जंजीरें टूटी, बदल गयी है अपनी काया
भारत की आजादी का, मतलब आज समझ में आया

राम राज की छवि दिखाए, मिशन ग्रीन का द्वार है ऐसा – दुराचार का नाश दिखाए , क्रान्ति युद्ध का सार है ऐसा
बादल ने यूँ गरज गरज कर , आजादी का वो गीत सुनाया – चिंता की जंजीरें टूटी, बदल गयी है अपनी काया
भारत की आजादी का, मतलब आज समझ में आया

– पुनीत वर्मा की कलम से – मिशन ग्रीन दिल्ली

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