फेस पे अपने नीम लगालो

 

ग्रीन शहर का सपना बुनकर, ग्रीन ब्लॉग का ध्यान करो तुम  – देख के अपने सेल का बैलेंस, हमसे दो पल बात करो तुम
दिल्ली को अब ग्रीन बनालो, ग्रीन सिटी का ड्रीम जगालो  – मस्त भरा अब स्माइल करो तुम ,फेस पे अपने नीम लगालो
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मोर्निंग में अब वाल्क करो तुम ,ब्रेक फास्ट में दूध पियो तुम  – लंच में खुद को जूस पिलाकर, मस्त ये अपनी लाइफ जिओ तुम
डस्टिंग वस्टिंग शुरू करो अब, रूम को अपने कलीन बनालो   – मस्त भरा अब स्माइल करो तुम ,फेस पे अपने नीम लगालो

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काम से अपने समय चुरा कर, थोडा सा रोमांस करो तुम  – दिल पे अपने हाथ फेर कर, थोडा सा अब डांस करो तुम
मेरी लाइंस भूल के अब तो, ग्रीन टेक की टीम बनालो  – मस्त भरा अब स्माइल करो तुम ,फेस पे अपने नीम लगालो

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सहयोग और समन्वय की विपरीत दिशा में

 

दिल्ली मुंबई बंगलुरु या फिर चेन्नई, कहीं भी चले जाओ. लेकिन हर पल जिससे भी हम मिलते हैं कहीं ना कहीं वो एक अनजान दिल की तरह नजर आता है. हम एक अनजान की तरह उससे मिलते हैं और फिर अपनी डगर पर आगे बढ जाते  हैं. दिन के चोबीस घंटों में हमे वो नहीं मिलता जो हमे ऐसे समझता हो जैसे हम सदीओं से एक साथ हों. कोई ऐसा जिसके साथ हम घंटों चुप भी बैठे हों लेकिन उसका हमारे साथ होना ही हमारे लिए सब कुछ हो, हमारे दिल को ख़ुशी देता हो. दुनिया हाई टेक सी प्रतीत हो रही है और इंसान रोबोट की तरह कार्य करते हुए नजर आते हैं. सभी अपने काम में इस तरह खो गए हैं की जैसे एक रोबोट या फिर कोई मिटटी का पुतला. भावनाओं की दुनिया समाप्त सी होती जा रही है और हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे और हर Hi .. Hello .. गुड मार्निंग या गुड evening के पीछे कोई भावना नजर नहीं आती. ऐसा लगता है मानो हमारी बुद्धि को प्रोग्राम कर दिया गया हो की इस इनपुट पे ये output देना है.मुख से निकलने वाले संगीत की जगह मोबाइल के इयर फ़ोन से निकलने वाली खोफ्नाक तरंगों ने ले ली है.  नृत्य कर के मन बहलाने की जगह आज हम एक कुर्सी पर बैठे कंप्यूटर या मोबाइल पर मनोरंजन के नाम पर अपनी आँखों को नुक्सान पहुंचाने में लगे हुए हैं. चेहरे पर चश्मा लगा हुआ है फिर भी एक समझदार रोबोट की तरह कंप्यूटर और मोबाइल से खतरनाक तरंगे खींच रहे हैं और खुश हो रहे हैं.

हम पूरी तरह भूल चुके हैं की कोई भी काम आपसी रिश्तों को खुश्मय बनाने के लिए और अपने आप में सुधार लाने के लिए किया जाता है. लेकिन काम के नाम पर हम दोस्ती, प्यार, मोह्हबत, इज्ज़त चिंता और देखभाल के साथ खिलवार करने में लगे हुए हैं. ना जाने क्यों एक दुसरे से प्यार करने की बजाए  हम race करने में लगे हुए हैं. खेर जो भी हो मुघे अपने मन को इस race से बाहर रखना है ताकि जीवन का भरपूर आनंद लिया जा सके. किसी भी कार्य में तरक्की race करने से नहीं बल्कि सहयोग और समन्वय करने से होती है. जब तक हम race में लगे रहेंगे तब तक हम दुसरे व्यक्ति को नहीं समझ सकते और कभी सफल नहीं हो सकते.  दो रास्ते हैं : एक तो race कर लीजिये और दूसरा सहयोग कर लीजिये.  ये हम पर है की हम क्या  चूस करते हैं. धन्यवाद दोस्त.

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ग्रीन टेक पर लोगिन कर लो

ग्रीन App पे काम करो अब, ग्रीन पाथ पे आगे बढ लो – सर्वर सिस्टम छोड़ के अब तो , ग्रीन टेक की poems पड लो
गुस्सा वुस्सा छोड़ के अब तो, टेंशन फ्री ये दिन करो तुम – मिशन ग्रीन को ढून्ढ के, ग्रीन टेक पर लोगिन कर लो
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घर को अपने ग्रीन बनालो, सोलर सिस्टम्स को अपना लो – टीवी पी सी बंद करो अब, ग्रीन टेक की Poems गा लो
ग्रीन टेक का भोग लगा के, कराउन में अपने मोती जड़ लो – मिशन ग्रीन को ढून्ढ के, ग्रीन टेक पर लोगिन कर लो
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हद से ज्यादा इनपुट लेकर, खाने को ना waste करो तुम – ग्रीन चाय का सिप लगाके, ग्रीन ब्लॉग को taste करो तुम
बचों को फल दान में देकर, ग्रीन सूप का प्याला भर लो – मिशन ग्रीन को ढून्ढ के, ग्रीन टेक पर लोगिन कर लो

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