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Poetry
मुग्को वो आवाज अब, नयी नयी सी लगती है
हलकी सी नाराज और, खोई खोई सी लगती है – मुघ्को ये दुनिया अब, सोयी सोयी सी लगती है
चलता हूँ मैं पथ पर अपने, उड़ता हूँ मैं रथ पर अपने – मुग्को वो आवाज अब, नयी नयी सी लगती है
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तुग्को पीछे छोड़कर, पाया मैंने लाखों को – दिल को अपने खोल दिया है,खोल दिया है आँखों को,
तेरी ये कहानी मुघ्को, कही कही सी लगति है – चलता हूँ मैं पथ पर अपने, उड़ता हूँ मैं रथ पर अपने
मुग्को वो आवाज अब, नयी नयी सी लगती है
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पल पल सबका चेहरा बदला ,मनोरंजन की इस दुनिया में – कलाकार भी नए मिले, दुखभंजन की इस दुनिया में
मुघ्को उसकी हाँ भी अब, नहीं नहीं सी लगती है – चलता हूँ मैं पथ पर अपने, उड़ता हूँ मैं रथ पर अपने
मुग्को वो आवाज अब, नयी नयी सी लगती है
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लाइंस पे मेरी हँसते हँसते, मोती तेरे टीथ हो गए
गर्मी के इस मौसम में, हॉट माइंड भी शीत हो गए – मुख से तेरे जो भी निकले, बोल वही संगीत हो गए
काम में मैंने रूचि गवाई, लाइफ में मैंने रूचि गवाई – लाइंस पे मेरी हँसते हँसते, मोती तेरे टीथ हो गए
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रुची का यूँ भंवर उठा है, शर्म का देखो कवर उठा है – खो कर तेरे सपनो में, सुबह सुबह ये लवर उठा है
लाइफ में मेरी एंटर करके , इतने क्यों तुम स्वीट हो गए – लाइंस पे मेरी हँसते हँसते, मोती तेरे टीथ हो गए
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ग्रीन टेक में रूचि समाई, हर पल हमने नींद गवाई – एक बार जो तुघ्को देखा, दिल की हमने वाट लगाई
दिल को रख के फीट में तेरे, प्यार में तेरे बीट हो गए – लाइंस पे मेरी हँसते हँसते, मोती तेरे टीथ हो गए
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