तेरे इंडेक्स पेज का, मैं तो अध्याय बन गया

ज्ञान के समंदर में, किताबों के मंदिर में  – तेरा यूँ दीदार हुआ, मुघ्को तुघ्से प्यार हुआ
तुघ्को गीता मान कर, मैं तो गुड बॉय बन गया – तेरे इंडेक्स पेज का, मैं तो अध्याय बन गया
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पहला पन्ना खोल के मैं तो, तुघ्को अपना मान था बैठा  – एक पृष्ठ के लेख को, मैं पूरी स्टोरी जान था बैठा
तुघ्को बेबी मान कर, मैं तो टॉय बन गया  – तेरे इंडेक्स पेज का, मैं तो अध्याय बन गया
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तुघ्को साथ था लेकर चलता, वृन्दावन की गलिओं में – तेरी हंसी को कैद किया था, फूलों की इन कलिओं में
तुघ्को ग्वालन मान कर, मैं तो गाय बन गया  – तेरे इंडेक्स पेज का, मैं तो अध्याय बन गया

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तू मिलती मुघ्को हर पल दिन में, रात को ख़्वाबों में – तू दिखती मुघ्को ऊपर नीचे, ऑनलाइन किताबों में
जीवन तुघ्को मान कर, मैं तो जोय बन गया  – तेरे इंडेक्स पेज का, मैं तो अध्याय बन गया

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ग्रीन टेक की दुनिया में , मैं उड़ता हुआ जा रहा हूँ

 

घर से हूँ निकला , इबादत के विमान में – बस तेरा नाम लेके, खुशिओं  के जहान में
मोह्हबत की बगिया में, मैं लड़ता हुआ जा रहा हूँ  – ग्रीन टेक की दुनिया में , मैं उड़ता हुआ जा रहा हूँ

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नीले अम्बर के साथ, और सुबह के आँचल में – ना ही शिमला में, ना ही उत्तरांचल में
दिल्ली की सड़क पर, मैं बढता हुआ जा रहा हूँ  – ग्रीन टेक की दुनिया में , मैं उड़ता हुआ जा रहा हूँ

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प्रेम पथ के किनारों पर , यूँ प्यार का लगा के बूटा   – तेरी हंसी का ध्यान करके, अक्षरधाम है पीछे छूटा
मिशन ग्रीन की पोथी को, मैं पड़ता हुआ जा रहा हूँ  – ग्रीन टेक की दुनिया में , मैं उड़ता हुआ जा रहा हूँ

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उस दुनिया में घूमता हूँ, जहां हर तरफ सितारे हैं

इस गहरे आकाश में,  सूरज भी है चन्दा भी है  – हम जैसा उल्का भी है, प्रथ्वी का कन्धा भी है
मंगल हो या बुध हो, सभी दोस्त हमारे हैं  – उस दुनिया में घूमता हूँ, जहां हर तरफ सितारे हैं

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हीरों की इस नगरी में, हसना सुबह शाम होगा  – उल्का की इस जर्नी में , मेरा क्या अंजाम होगा
गंगा हो या जमुना हो, सबके दो किनारे हैं – उस दुनिया में घूमता हूँ, जहां हर तरफ सितारे हैं

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अन्धकार में लेंस लगा के, उल्का का ये साइलेंस देखो – टाइम से आना टाइम से जाना, सबका अजब ये बैलेंस देखो
सर्दी हो या गर्मी हो, देखो मस्त बहारें हैं  – उस दुनिया में घूमता हूँ, जहां हर तरफ सितारे हैं

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कृतियों के ब्रह्माण्ड में, उल्का क्यों बदनाम है – पोएम के इस पाठक को, उल्का का प्रणाम है
बादल भी है बिजली भी है , बारिश की फुहारे हैं  – उस दुनिया में घूमता हूँ, जहां हर तरफ सितारे हैं

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