इस सुहानी सांझ में, मुघ्को तुम आवाज ना देना

 

मेरे इस यकीन को, फिर कोई लिबाज़ ना देना -दिल से मेरे निकल रहे, सुर को तुम कोई साज़ ना देना
यूँ ही बैठे रहने दो, यूँ ही रूठे रहने दो – इस सुहानी सांझ में, मुघ्को तुम आवाज ना देना

—————————————————————–

नारंगी ये शाम हुई है, शहर की सर्ड्कें जाम हुई हैं – झील किनारे मैं हूँ बैठा, दुनिया ये बदनाम हुई है
अपनी प्यार मोह्हबत का, जाहिर कर कोई राज ना देना
यूँ ही बैठे रहने दो, यूँ ही रूठे रहने दो – इस सुहानी सांझ में, मुघ्को तुम आवाज ना देना

——————————————————————-

चिडिओं का घर वापस जाना, मुघ्को अच्छा लगता है – सूरज का यूँ छिपते जाना , मुघ्को सच्चा लगता है
अपने हँसते होठों को, होने तुम नाराज न देना

यूँ ही बैठे रहने दो, यूँ ही रूठे रहने दो – इस सुहानी सांझ में, मुघ्को तुम आवाज ना देना

Loading

ग्रीन टेक पर लोगिन कर लो

ग्रीन App पे काम करो अब, ग्रीन पाथ पे आगे बढ लो – सर्वर सिस्टम छोड़ के अब तो , ग्रीन टेक की poems पड लो
गुस्सा वुस्सा छोड़ के अब तो, टेंशन फ्री ये दिन करो तुम – मिशन ग्रीन को ढून्ढ के, ग्रीन टेक पर लोगिन कर लो
__________________________________________________________

घर को अपने ग्रीन बनालो, सोलर सिस्टम्स को अपना लो – टीवी पी सी बंद करो अब, ग्रीन टेक की Poems गा लो
ग्रीन टेक का भोग लगा के, कराउन में अपने मोती जड़ लो – मिशन ग्रीन को ढून्ढ के, ग्रीन टेक पर लोगिन कर लो
__________________________________________________________

हद से ज्यादा इनपुट लेकर, खाने को ना waste करो तुम – ग्रीन चाय का सिप लगाके, ग्रीन ब्लॉग को taste करो तुम
बचों को फल दान में देकर, ग्रीन सूप का प्याला भर लो – मिशन ग्रीन को ढून्ढ के, ग्रीन टेक पर लोगिन कर लो

Mail us your feedback at missiongreendelhi@gmail.com

Loading

What are you looking for ?

    ×
    Connect with Us

      ×
      Subscribe

        ×