ग्रीन शहर की कविता लिखकर

श्रद्धा का ये  जाल काट कर, दोस्त के झूठे बोल समझ ले  – मात पिता की बात समझ तू , धन का अब तो मोल समझ ले  – दिल्ली  की  इस नगरी में, अब नदिया जैसा बहता हूँ
ग्रीन शहर की कविता लिखकर, सची बात मैं कहता हूँ

___________________________________________

आदत तेरी बुरी नहीं है , बुरी तुम्हारी संगत है – मौसम का बस असर हुआ है, बदली सी जो  रंगत है
आंखें खोल के अपनी मैं तो, ग्रीन हार्ट में रहता हूँ   – दिल्ली  की  इस नगरी में, अब नदिया जैसा बहता हूँ
ग्रीन शहर की कविता लिखकर, सची बात मैं कहता हूँ

___________________________________________

रक्षक बनकर तेरी लाइफ का , मात पिता ने तुघ्को पाला – भ्रष्ट बुद्धि को दण्डित करके, उन्होंने हर पल तुघे संभाला
भूल के सब कुछ तू क्यों बोले, यार मैं सब कुछ सहता हूँ  – दिल्ली  की  इस नगरी में, अब नदिया जैसा बहता हूँ
ग्रीन शहर की कविता लिखकर, सची बात मैं कहता हूँ

Facebook Comments

Puneet Verma
Puneet Verma is environmental blogger & Mission Green Delhi(MGD) crusader. MGD Platform has been supported by more than 260 environmentalists from Delhi & other parts of India.

Puneet is Acumen & Ideo.org certified Human-Centered Design professional and techie who has vast experience in managing online portfolio of big corporate brands.

Subscribe to youtube channel of Puneet "Life of Webmaster" at https://goo.gl/3sVNPM

For business promotion, whatsapp him at +919910162399 or email at missiongreendelhi@gmail.com.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

What are you looking for ?


Your Email

Let us know your need

×
Connect with Us

Your Name (required)

Your Email (required)

Your Message


×
Subscribe

×