फेसबुक की दुनिया में , ये कैसा फ्रेंड मिल गया

 

मिशन ग्रीन को छोड़ के, शौपिंग करने हम हैं निकले – देख के अपना सविंग बैलेंस , डेबिट कार्ड का दम है निकले
इन्टरनेट की दुनिया में , ये कैसा ट्रेंड मिल गया – फेसबुक की दुनिया में , ये कैसा फ्रेंड मिल गया

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फेसबूक ने खूब जगाया, youtube ने है खूब रुलाया – फार्म विल्ले के खेल से , ग्रीन टेक  ने खूब बुलाया

वाल्ल्मार्ट की दुनिया में ,ये कैसा ब्रेंड मिल गया – फेसबुक की दुनिया में , ये कैसा फ्रेंड मिल गया

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windows की इस दुनिया में,  एक्स्प्लोरर तो अब सो गया है – फेसबुक का हर इक user, firefox  में खो गया है
browsers के इस सागर में , ये कैसा स्ट्रेंड मिल गया – फेसबुक की दुनिया में , ये कैसा फ्रेंड मिल गया

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ग्रीन टेक के दर्शन करके, मैं दिल्ली से आया हूँ

देश की अपने शान लेकर, क्रान्ति वीर का ध्यान लेकर – आया हूँ मैं डिस्क में तेरी, ग्रीन टेक का यान लेकर

ना  गाडिओं का धुंआ लाया हूँ , ना corruption का कुआं लाया हूँ   – ग्रीन टेक के दर्शन करके, मैं दिल्ली से आया हूँ

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दोस्ती की सौगात लेकर, ग्रीन दिल्ली का प्यार लेकर – आया हूँ मैं स्क्रीन पे तेरी, ग्रीन टेक का सार लेकर

ना बरखा की फुहार लाया हूँ, ना dengue का बुखार लाया हूँ   – ग्रीन टेक के दर्शन करके, मैं दिल्ली से आया हूँ

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गुरु का अपने ध्यान लेकर, कॉलेज का अपने ज्ञान लेकर – आया हूँ मैं लाइफ में तेरी,   शहर का अपने मान लेकर

ना क्रोध का जाल लाया हूँ, ना दुखिओं का हाल लाया हूँ   – ग्रीन टेक के दर्शन करके, मैं दिल्ली से आया हूँ

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हमको छुट्टी नहीं चाहिए, ग्रीन टेक पे लिखना है

ग्रीन डे का जशन मनाके, ग्रीन जूस का सिप लगा लो   – कर्म  को अपने गले लगाके, सन्डे को भी ग्रीन बना लो
कहत पुनीत सुनो भाई साधो, ग्रीन ब्लॉग पे दिखना है  – हमको छुट्टी नहीं चाहिए, ग्रीन टेक पे लिखना है

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मन को अपने ग्रीन बना के, सिटी को अपनी क्लीन बना लो  – मिशन ग्रीन का भोग लगा के, प्रोडक्ट को अपने ग्रीन बना लो
दिल्ली की हर शाप में, ग्रीन फ़ूड ही बिकना है  – हमको छुट्टी नहीं चाहिए, ग्रीन टेक पे लिखना है

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पेड़ की जड़ को पीठ दिखाके, ड़ाल को कब तक सींचोगे – ग्रीन ब्लॉग से नजर चुराके, आँख को कब तक मीचोगे
माया के इस लोक में, ग्रीन हार्ट ही टिकना है  – हमको छुट्टी नहीं चाहिए, ग्रीन टेक पे लिखना है

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