Maiya Meri Jaldi Aana

उन सभी कार्यरत मांओं के लिए जो शिशुगृह में बच्चों को दिन भर छोड़ कर काम पर जाती हैं

आतुर कातर से नयनों से
मूक शब्द बस यही पुकारें
बिल्कुल भी मत देर लगाना
मैय्या मेरी जल्दी आना

चौक चौबारा चौखट लांघें
नयनों को अब कैसे बांधें

सुघड़ सलोने से आंगन में
बहुत ढेर से संगी साथी
दौड़ लगाते रोते गाते
खाना खाते फिर सो जाते

सब सपनों में तूँ ही आना
ज़रा तनिक न देर लगाना
मैय्या मेरी जल्दी आना

तेरी याद बहुत सताती
मखमल की सी गर्माहट को
तरसा करते रोते जाते

चार पहर की कैसी दूरी
कितनी मुश्किल हमीं बिताते

दौड़ी दौड़ी जल्दी आना
इक पल भी मत देर लगाना
मैय्या मेरी जल्दी आना

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Bhupesh Khatri Ji is hindi and urdu poet who belongs to Allahabad. He works as Deputy Director (software) at IGNOU, New Delhi.
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