आज सवेरा हो गया

 

खिड़की खुली है, आज अचानक  –  ख़तम हुई है, रात भयानक
तेरे शीतल हाथ  छुए तो, ख़तम अँधेरा हो गया  – आँखें खुली तो मैंने पाया, आज सवेरा हो गया

__________________________________________

होठों को मुस्कान मिली है, तेरी हंसी का जादू चल गया  – तन्हाई के जंगल में , खुशिओं का अब रस्ता मिल गया
दिशा हुई है आज हमारी, वक़्त हमारा हो गया  – तेरे शीतल हाथ  छुए तो, ख़तम अँधेरा हो गया
आँखें खुली तो मैंने पाया, आज सवेरा हो गया

__________________________________________

सपना टूटा, हमको लूटा, तेरी मीठी बोली  ने  – शहर ये बदला, देश ये बदला,  ग्रीन टेक की टोली  ने
चिड़िया चहकी जीवन में तो, शुरू बसेरा हो गया  – तेरे शीतल हाथ  छुए तो, ख़तम अँधेरा हो गया
आँखें खुली तो मैंने पाया, आज सवेरा हो गया

Loading

What is Right & What is Wrong ?

आज मस्तिस्क में एक सवाल उठा है. हम अपनी डेली लाइफ में कैसे पता लगाएं की क्या सही है और क्या गलत.तो मुघे जवाब मिलता है की दुनिया में कोई भी चीज़ सही या गलत नहीं है. बल्कि मैं उसे कैसे स्वीकार करता हूँ वो भाव सही और गलत होता है.यानि अगर मैं किसी गलत चीज़ को सही भाव से स्वीकार करता हूँ वो तो सही है. और अगर किसी सही व्यक्ति को गलत भाव से स्वीकार करता हूँ वो गलत है. मेरा संचालन सही या गलत होता है. जैसे की अगर मैं किसी ग्रन्थ को पढ़ना चाहता हूँ और इस कारण उसको खोलता हूँ. फिर उसमे लिखे शब्दों को पड़ता हूँ . और फिर शब्दों के पीछे के भावों को गलत तरीके से ग्रहण करता हूँ और समझता हूँ और बांटता हूँ. तो यहाँ मैं गलत हो जाता हूँ.  सामने खड़ा व्यक्ति किसी कमजोर को नुक्सान पहुंचा रहा है और मैं राम की तरह सुग्रीव की मदद करता हूँ, तो मेरा सञ्चालन सही हो जाता है. अगर मैं इसे अनदेखा कर देता हूँ तो ये गलत हो जाता है. दो तरह के लोग है: जो सोये हुए हैं और वो जो जागे हुए हैं.पराशूट और दिमाग जब तक खुले हैं तब तक काम करते हैं. हमारा हर वो कार्य जो हमारी बंद आँखें खोल देता है वो सही है. और हमारा हर वो कार्य जो हमारे मन और बुद्धि रुपी चक्षुओं को बंद कर देता है, वो गलत है. अगर मेरा वर्तमान कार्य मेरे ज्ञान चक्षुओं को खोल रहा है, तो मेरा आज सही होगा.  अगर मेरा आज या वर्तमान सही है तो वो सही भूतकाल में बदल जाएगा. और अगर भूतकाल और वर्तमान सही हैं तो भविष्य का निर्माण सही होगा.

 

Loading

Lekar Tonic Khushion Kaa, Green Tech Kaa Spoon Aaya

पांच महीने बीते झट से, लेकर गर्मी जून आया – दिन भर तपती धरती पर, ठंडक लेकर मून आया
देखो टीना थक कर बैठी, देखो राहुल थक कर बैठा  – लेकर टोनिक खुशिओं का, ग्रीन टेक का स्पून आया
__________________________________________

मानव के कर्मो से कब तक, धरती जलती जाएगी  – हफ्ता हफ्ता वेट करा कर, बरखा कब तू आएगी
गर्म गर्म ये रूरकी बीता, आखिर देहरादून आया  – देखो टीना थक कर बैठी, देखो राहुल थक कर बैठा
लेकर टोनिक खुशिओं का, ग्रीन टेक का स्पून आया
__________________________________________

काट काट कर पेड़ों को, इतना कागज़ क्यों तू खाए – देकर धोखा दुनिया को, दिल को अपने क्यों जलाए
रक्त दान के सेण्टर पर , देकर अपना खून आया – देखो टीना थक कर बैठी, देखो राहुल थक कर बैठा
लेकर टोनिक खुशिओं का, ग्रीन टेक का स्पून आया
__________________________________________

शीतल शीतल प्याऊ का, शीतल शीतल पानी पी ले – सचे गुरु के मुख से निकली, मीठी मीठी वाणी पी ले
मिशन ग्रीन का सुन्दर सपना, लेकर ये जूनून आया – देखो टीना थक कर बैठी, देखो राहुल  थक कर बैठा
लेकर टोनिक खुशिओं का, ग्रीन टेक का स्पून आया

Mail us at missiongreendelhi@gmail.com

Loading

What are you looking for ?

    ×
    Connect with Us

      ×
      Subscribe

        ×