बारिश की इन बूंदों को , बाँट रहा हो गिनकर जैसे

 

मौसम का अंदाज है बदला, गर्म हवा को छोड़ के पीछे – टिप टिप पानी उस पर बरसा, पीपल है जो मोड़ के पीछे
देखो काली घटा के पीछे, चमक रहा है दिनकर ऐसे – बारिश की इन बूंदों को , बाँट रहा हो गिनकर जैसे
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बूँद बूँद को मुख से पीती, प्यासी धरती सुखी हुई अब – आसमान को ताक़ रही है, नजर हमारी झुकी हुई अब
वृक्ष के पीले पतों को, तोड़ रहा हो चुनकर जैसे – देखो काली घटा के पीछे, चमक रहा है दिनकर ऐसे
बारिश की इन बूंदों को , बाँट रहा हो गिनकर जैसे
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पूरब पश्चिम हर दिशा में, आज बजी है कैसी सरगम – दिल्ली की इन् सड़कों पर, कोयल कूक रही है हरदम
क़ुदरत के इन फूलों को , जोड़ रहा हो बुनकर जैसे – देखो काली घटा के पीछे, चमक रहा है दिनकर ऐसे
बारिश की इन बूंदों को , बाँट रहा हो गिनकर जैसे

By Puneet Verma – puneet6565@gmail.com

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ग्रीन शहर की कविता लिखकर

श्रद्धा का ये  जाल काट कर, दोस्त के झूठे बोल समझ ले  – मात पिता की बात समझ तू , धन का अब तो मोल समझ ले  – दिल्ली  की  इस नगरी में, अब नदिया जैसा बहता हूँ
ग्रीन शहर की कविता लिखकर, सची बात मैं कहता हूँ

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आदत तेरी बुरी नहीं है , बुरी तुम्हारी संगत है – मौसम का बस असर हुआ है, बदली सी जो  रंगत है
आंखें खोल के अपनी मैं तो, ग्रीन हार्ट में रहता हूँ   – दिल्ली  की  इस नगरी में, अब नदिया जैसा बहता हूँ
ग्रीन शहर की कविता लिखकर, सची बात मैं कहता हूँ

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रक्षक बनकर तेरी लाइफ का , मात पिता ने तुघ्को पाला – भ्रष्ट बुद्धि को दण्डित करके, उन्होंने हर पल तुघे संभाला
भूल के सब कुछ तू क्यों बोले, यार मैं सब कुछ सहता हूँ  – दिल्ली  की  इस नगरी में, अब नदिया जैसा बहता हूँ
ग्रीन शहर की कविता लिखकर, सची बात मैं कहता हूँ

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Daily Management Accounting

दोस्तों .. हम जानते हैं की जो  भी चीज़ हम खरीदते हैं समय के साथ साथ वो पुराणी होती रहती है और उसका मूल्य कम होता रहता है. और एक दिन ऐसा आता है जब हम बहुत कम मूल्य में उस चीज़ को कबार्ड में बेच देते हैं. और फिर और ज्यादा कीमत देकर उसको नयी चीज़ से बदल देते हैं. लेकिन क्या हमारी उम्र जैसे जैसे बड़ रही है, हम अपना सब्स्तीटूट पैदा कर सकते हैं ? मैं बिज़नस करने के लिए एक मशीन खरीदता हूँ और उसके इस्तेमाल से पूरा साल प्रोडक्शन करता हूँ और एक दिन ऐसा आता है जब वो मशीन काम करना बंद कर देती है और मेरा प्रोडक्शन बंद हो जाता है. प्रोडक्शन बंद हो जाता है तो सामान बिकना बंद हो जाता है. और मेरा लाभ आना समाप्त हो जाता है. फिर मैं और पैसा देकर नयी मशीन खरीद लेता हूँ. लेकिन समझदार व्यक्ति वो है जो नयी मशीन के लिए हर महीने के लाभ में से थोडा पैसा जमा करता है. ये तो मशीन की बात थी लेकिन क्या उस दिन जब मेरा शरीर काम करना बंद कर देगा तब क्या मैं इसको नए शरीर से बदल पाऊंगा ? कोई भी बिजनस लाभ के लिए किया जाता है और मुघे पता होना चाहिए की मैंने जो पूरा महीना मेहनत की उससे मुघे क्या लाभ हुआ. और मुघे पता होना चाहिए की मैंने एक महीने में जो पैसा कमाया है उसमे से हर दिन मैंने कितना कहाँ खर्च किया है.और आने वाले महीनो में मैं कितना कहाँ खर्च करूँगा. अगर मैं ये रिकॉर्ड तैयार करता हूँ की कितना पैसा किस कारण डेबिट हुआ है और कितना अगले महीने होगा तो में उस रिकॉर्ड का विश्लेषण करके ये पता लगा सकता हूँ की मेरा धन कहाँ कहाँ व्यर्थ गया है. और अगले महीने में मैं  वो व्यर्थ के डेबिट नहीं करने का निर्णय ले सकता हूँ. और वो व्यर्थ होने वाला पैसा मेरे लाभ में जुड़ जाएगा. और इस तरह हर महीने का लाभ जुड़कर पूरे साल लाभ बन जाएगा.  और जिस प्रकार एक बिजनस के लिए मैनेजमेंट अकाउटिंग काम करती है, उसी तरह ये हमारे जीवन में प्रतिदिन लाभदायक सिद्ध होती रहती है . मुघे उम्मीद है की सिर्फ इतना काम करने मात्र से वृधावस्था में हमे किसी और की आवशयकता नहीं पड़ेगी.

 

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