Delhi is for Everyone

दिल्ली में गाँव से जब एक व्यक्ति आता है तो ये शहर उसे कई तरह के मौके देता है. कभी कभी जब अच्छा मौक़ा नहीं भी मिल पाता है, तब वो व्यक्ति किसी छोटे व्यापार से शुरुआत करता है. ऐसे कई छोटे व्यापारी मिल जाएंगे जो दिल्ली शहर में अपने सपनों को पूरा करने की उम्मीद में जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं और अपना घर परिवार चला रहे हैं. जिंदगी ठीक ठाक चल रही है. लेकिन जब कोई उनके रोजगार और सपनों को तोड़ने की उम्मीद लेकर खडा हो जाता है, तब उनकी सहनशक्ति ख़तम हो जाती है और वो गेर कानूनी कदम उठाने पर मजबूर हो जाते हैं.  क्या उनको अपनी परिवार के लिए कर्म करने का हक नहीं है ? क्या उनको सपने देखने का हक नहीं है ? क्या ये शहर उनका नहीं है ? सरकार द्वारा जब भी कोई कदम उठाया जाए, तो वो कदम इन वयापारिओं के परिवार को ध्यान में रख कर उठाया जाना चाहिए क्योंकि इस शहर पर एक आम व्यक्ति का उतना ही हक होता है जितना की बड़े वयापारिओं, नेताओं और पेशेवरों का . हर एक व्यक्ति जब कभी इस शहर में आया था तो उसने जमीन से ही अपने सपनों को पूरा करने की शुरुआत की थी और आज आसमान की बुलंदिओं को छुआ है. इसलिए हमे कोई हक नहीं बनता की हम इन् व्यापारिओं से उनका इस शहर पर हक छीने.

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The Power of Lokpal Lens

दोस्तों लोकपाल बिल एक लेंस की तरह है और हमारे लिए यह जानना और भी जरूरी हो गया है की इस सच्चाई के लेंस के नीचे किस किस को डालना होगा. और इसके साथ साथ यह भी जानना जरूरी है की जिन नेताओं को हम खुद चुन कर संसद तक ले जाते हैं, क्या  उनको लोकपाल के लेंस के नीचे ले जाना ठीक होगा ? और अगर ये ठीक है तो हमारे द्वारा किये गए चुनाव पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है. लोकपाल बिल कब आएगा इसका तो अभी तक कोई deadline नजर नहीं आ रहा लेकिन दिल्ली में लोकपाल के लिए उमरे जन सैलाब ने पूरी दुनिया के लिए उदाहरण पेश किया है. ना सिर्फ दिल्ली की जनता ने, बल्कि पूरा भारत आज दुनिया को corruption से लड़ने का उदाहरण पेश करता हुआ नज़र आ रहा है. आज भारत के लोगों ने दिखा दिया की हम भले ही अलग अलग ऊँगली की तरह नजर आते हों लेकिन हम एक ही शरीर का हिस्सा हैं जो जब चाहे मुक्का बन कर दुश्मन का मुह तोड़ सकता हैं. आज के इस जन सैलाब से पडोसी देश भी सीख लेंगे और अपने अपने देशों में आन्दोलन खड़ा करेंगे. आओ दोस्तों … आज देश को बदलने की नहीं … शहर को बदलने की नहीं … दूसरों को बदलने की नहीं … अपने आप जो जानने की और बदलने की प्रतिज्ञा करें और इस विशाल खुशबूदार, पावन नदिया के साथ बहते चलें जाएं और एक नया शहर देखें जिसका सपना हम कई वर्षों से देख रहे थे. इन्सानिअत जिंदाबाद.

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